Tuesday, January 21, 2020

إيزابيل دوس سانتوس: الغنية الإفريقية التي أفقرت بلدها

كشفت وثائق مسربة عن الكيفية التي تمكنت بها أغنىالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع إمرأة في إفريقيا من جمع ثروة طائلة عن طريق الفساد واستغلال بلادها.
فقد حصلت إيزابيل دوس سانتوس على عقود مالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعربحة في مجالات النفط والألماس والعقارات والاتصالات الهاتفية عندما كان والدها يرأس أنغولا، البلد الإفريقي الثري بالموارد الطبيعية. الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع
وبيّنت الوثائق كيف سُمِح لها والاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعلزوجها بشراء أصول حكومية باهضة الثمن عن طريق سلسلة من العقود المريبة.
ولكن إيزابيل تنفي هذه التهم عن نفسها وتقول إنها (أي التهم) غير صحيحالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعة وهي حملة ذات دوافع سياسية تقوم بها الحكومة الأنغولية.
يذكر أن إبنة الرئيس الأنغولي السابق تالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعقيم الآن في بريطانيا حيث اشترت عددا من العقارات الراقية في قلب العاصمة لندن.
وتخضع إيزابيل للتحقيق من جانب السلطات الأنغوليالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعة بتهمة الفساد، بينما جمدت أنغولا أموالها.
أما الآن، فقد أتيحت لبي بي سي فرصة الإطلاع على أكثر مالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعن 700 ألف وثيقة مسرّبة تتعلق بتفاصيل الإمبراطورية المالية التي تعود للمليارديرة الأنغولية.
حصل على هذه الوثائق منبر حماية المبلغين عن المخالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعالفات في إفريقيا، الذي أطلع بدوره الإتحاد الدولي للصحفيين التحقيقيين ( ICIJ) عليها.
وحققت في صحة الوثائق 37 مؤسسة اعلامية بما فيها صالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعحيفتا الغارديان البريطانية وأكسبريسو البالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعرتغالية اضافة إلى نيويورك تايمز الأمريكية.الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع
ويقول أندرو فاينستاين من منظمة ( Corruption Watch)الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع المتخصصة في رصد الفساد إن الوثائق المسربة تبيّن كيف استغلّت إيزابيل دوس سانتوس بلدها على حساب المواطنين الأنغوليين العاديين.
ويمضي فاينستاين للقول، "في كل مرة تظهر فيها على غلاف مجالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعلة في بلد ما، وفي كل مرة تقيم واحدة من حفلاتها الباذخة في جنوبي فرنسا، تفعل هذه الأشياء بالدوس على طموحات الشعب الأنغولي".
أما الإتحاد الدولي الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعلصحفيي التحقيقات، فقد أطلق على الوثائق اسم "تسريبات لواندا" ( Luanda Leaks).

العلاقة بالنفط

أبرم واحد من أكثر العقود ريبة من خلال احدى الشركات البريطانيةالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع في لندن والتابعة لشركة النفط الوطنية الأالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعنغولية (سونانغول).
كانت إيزابيل قد عيّنت مديرة لسونانغول فيالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع عام 2016 في وقت كانت الشركة تعاني فيه من مصاعب مالية، وذلك بفضل مرسوم جمهوري أصدره والدها الرئيس جوزيه أدواردو دوس سانتوس الذي حكمالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع أنغولا بيد من حديد طيلة 38 سنة.
ولكن عندما تنحى عن الحكم في أيلول / سبتمبر 2017، بدأ موقعها يتعرض للتهديد، بالرغم من أن والدها وخليفته ينتميان لنفس الحزب. وأقيلت إيزابيل من ادارة شركة النفط الوطنية بعد شهرين فقط.الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع
وأثار تصميم الرئيس الجديد جواو لورنسو ونشاطه في مطاردة مصالح أسرة سلالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعه التجارية استغراب الكثير من الأنغوليين.
وتبين الوثائق المسربة أن دوس سانتوس صدقّت عند مغادرتهاالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع منصبها في سونانغول على تحويلات مريبة بلغ مجموعها 58 مليون دولار لشركة استشارية في دبي تدعى ( Matter Business Solutions).
وتنفي دوس سانتوس أن تكون لها أي مصلحة مالية في هذه التحويلات، ولكن الوثائق الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعتبين إن الشركة المذكورة يشرف عليها مدير أعمالها وهي مملوكة لأحد أصدقائها.
وتوصّل برنامج بانوراما إلى أن الشركة أرسلت أكثالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعر من 50 فاتورة إلى فرع سونانغول في لندن في نفس اليوم الذي أقيلت فيه إيزابيل.
ويبدو من ذلك أن السيدة دوس سانتوس صدّقت على دفع هذه المبالغ إلى شركة صديقها بعد إقالتها.
ورغم أن شركة ( Matter Business Solutions) نفذت بالفعل بعض الأعمال الإستشارية، لكن لا توجالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعد في الفواتير تفاصيل كافية لتبرير هذه المبالغ الكبيرة.
إذ تطالب واحدة من الفواتير بمبلغ 472,196 يورو لقاء مصاريف غير مذكورة، بينما تطالب أخرى بمبلغ 928,517 دولار لخدمات قانونية غير محددة.
واثنتان من الفواتير - كل منهما بمبلغ 676,339.97الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع يورو - تتعلقان بنفس النشاطات في نفس التاريخ، ولكن دوس سانتوس صدّقت عليهما مع ذلك.
ويقول محامو شركة ( Matter Business الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعSolutions) إن الشركة كلفت بالمساعدة في اعادة هيكلة قطاع النفط الأنغولي، وإن الفواتير محل النقاش تتعلق بالأعمال التي نفذتها بالفعل شركات استشارية أخرى كانت قد استأجرت سونانغول خدماتها.
وأضافوا، "فيما يتعلق بالفواتير المتالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمععلقة بالمصاريف، فإنه من المألوف بالنسبة للشركات الإستشارية أن تضيف المصاريف بوصفها بندا عموميا. السبب في ذلك هو تجنب اصدار كميات كبيرة من الوثائق ...بإمكان شركة ( Matter Business Solutions) عرض أدلة خطية لاثبات كل المصاريف التي تحملتها."
أما محامي إيزابيل دوس سانتوس، فيقولون إن كل تصرفاتها المتعلقة بدفع الأموال لشركة ( Matter Business Solutions) قانونية تماما، وإنها لم تصدّق على أي مدفوعات بعد إقالتها من إدارة سونانغول.الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع
وقال المحامون، "كل الفواتير التي دفعت كانت تتعلق بخدمات متفق عليها بين الطرفين بموجب عقد صدّق عليه بمعرفة مجلس إدارة سونانغول وموافقته."
وكشف الإتحاد الدولي لصحفيي الالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعتحقيقات وبرنامج بانوراما تفاصيل جديدة تتعلق بالعقود التجارية والمالية التي جعلت من إيزابيل دوس سانتوس إمرأة ثرية.
فجزء كبير من ثروتها يعود لامتلاكها حصصا في شركة الطاقة ( Galp) البرتغالية، التي اشترتها إحدى شركاتها من سونانغول في عام 2006.
وتبين الوثائق المسربة أن الشركة المذكورة لم يكن عليها دفع إلا 15 في المئة من قيمة ( Galpالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع) مقدما. أما المبلغ المتبقي (63 مليون يوررو) فقد حوّل إلى قرض قليل الفائدة من سونانغول.
وبموجب الشروط الميسرة لهذا القرض، لم تضطر إلى الوفاء بدينها للشعب الأنغولي إلا بعد مضي 11 عاما.
وتتجاوز قيمة حصصها في ( Galp) الآن 750 مليون يورو.
وكانت الشركة العائدة لدوس سانتوس قد عبرت عن رغبتها في رد دين سونانغول في عام 2017.
ولكن كان ينبغي أن يرفض ذلك العالاباحية الجنس & أنيل الجنس جمعرض لأنه لم يتضمن فوائد تبلغ قيمتها 9 ملايين يورو.

Tuesday, January 14, 2020

शाहीन बाग़: रास्ता खुलवाने पर हाईकोर्ट ने कहा जनहित और क़ानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करे पुलिस

सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से ताबुक में बर्फ़बारी हुई है. बर्फ़बारी शुक्रवार सुबह से शुरू हुई थी.

अरब न्यूज़ के अनुसार बर्फ़ से जबल अल-लावज़, अल-दाहेर और अल्क़ान पर्वत ढँक गए हैं. सऊदी अरब का यह उत्तरी हिस्सा पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस इलाक़े में ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा रहता है इसलिए सरकार यहां सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है.

अरब न्यूज़ के अनुसार इस इलाक़े में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. प्रशासन ने लोगों को इस मौसम को लेकर सतर्क किया है. मौसम विभाग ने ताबुक, मदीना और उत्तरी सीमावर्ती इलाक़े में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.

अरबी अख़बार अशराक़ अल-अवसात के अनुसार सऊदी अरब में हर साल जबल अल-लावज़, जबल अल-ताहिर और ताबुक में जबल अल्क़ान पर्वतों पर दो से तीन हफ़्ते तक बर्फ़ गिरती है.

ये पहाड़ सऊदी अरब के उत्तर पश्चिमी इलाक़े में हैं. सऊदी में यहां बर्फ़ गिरने के बाद काफ़ी हलचल होती है.

बर्फ़ गिरने के बाद सऊदी के लोग भी इस इलाक़े में पहुंचने लगते हैं. ताबुक में टूरिज़म अथॉरिटी के जनसंपर्क अधिकारी वाइल अल-ख़ालदी ने अशराक़ अल-अवसात से कहा है, ''बर्फ़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. हमें उम्मीद है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. इस साल जब स्कूलों में छुट्टियां हैं तभी बर्फ़ भी गिरी है.''

जबल अल-लावज़ पहाड़ 2,600 मीटर ऊंचा है. इस पर्वत को अलमंड माउंटेन भी कहा जाता है क्योंकि इसके ढलान पर बड़ी संख्या में बादाम के पेड़ लगे हुए हैं.

हर साल इस पहाड़ पर बर्फ़बारी होती है और तापमान धड़ाम से नीचे चला आता है. ताबुक का शुमार सऊदी के सबसे ख़ूबसूरत इलाक़ों में है. यहां ख़ुश्बूदार पौधे हैं जिनका इस्तेमाल परफ़्यूम बनाने में होता है. ताबुक जॉर्डन की सीमा से लगा हुआ इलाक़ा है.

शाहिर बिन अतियाह ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है. इस वीडियो में दिख रहा है कि ताबुक में जमकर बर्फ़बारी हुई है. सारे पेड़ बर्फ़ में लिपटे हुए हैं. शाहिर ने लिखा है, ''क्या आप कल्पना कर सकते हैं? यह रूस नहीं है. इटली या नॉर्वे भी नहीं.''

एक और सोशल मीडिया यूज़र अब्दुल माजिद अल-शरीफ़ ने ट्वीट कर लिखा है, ''यह अल्लाह की इनायत है.''

पूरे मध्य-पूर्व में भारी बर्फ़बारी हो रही है. गल्फ़ न्यूज़ के अनुसार बुधवार को लेबनान के नैबतियेह प्रांत में भारी बर्फ़बारी से तीन लोगों की मौत हो गई है.

लेबनान के पश्चिमी इलाक़े के सारे पहाड़ बर्फ़ से ढँक गए है. ईरान, फ़लस्तीनी इलाक़े, लेबनान और जॉर्डन में भी भारी बर्फ़बारी हुई है. वेस्ट बैंक में रामल्लाह की सड़कें बर्फ़ से बंद हो गई है.

सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से ताबुक में बर्फ़बारी हुई है. बर्फ़बारी शुक्रवार सुबह से शुरू हुई थी.

अरब न्यूज़ के अनुसार बर्फ़ से जबल अल-लावज़, अल-दाहेर और अल्क़ान पर्वत ढँक गए हैं. सऊदी अरब का यह उत्तरी हिस्सा पर्यटकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस इलाक़े में ट्रैफ़िक बहुत ज़्यादा रहता है इसलिए सरकार यहां सुविधाएं लगातार बढ़ा रही है.

अरब न्यूज़ के अनुसार इस इलाक़े में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. प्रशासन ने लोगों को इस मौसम को लेकर सतर्क किया है. मौसम विभाग ने ताबुक, मदीना और उत्तरी सीमावर्ती इलाक़े में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.

अरबी अख़बार अशराक़ अल-अवसात के अनुसार सऊदी अरब में हर साल जबल अल-लावज़, जबल अल-ताहिर और ताबुक में जबल अल्क़ान पर्वतों पर दो से तीन हफ़्ते तक बर्फ़ गिरती है.

ये पहाड़ सऊदी अरब के उत्तर पश्चिमी इलाक़े में हैं. सऊदी में यहां बर्फ़ गिरने के बाद काफ़ी हलचल होती है.

बर्फ़ गिरने के बाद सऊदी के लोग भी इस इलाक़े में पहुंचने लगते हैं. ताबुक में टूरिज़म अथॉरिटी के जनसंपर्क अधिकारी वाइल अल-ख़ालदी ने अशराक़ अल-अवसात से कहा है, ''बर्फ़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं. हमें उम्मीद है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. इस साल जब स्कूलों में छुट्टियां हैं तभी बर्फ़ भी गिरी है.''

Tuesday, January 7, 2020

ما الحيل التي تمكنك من القراءة بسرعة فائقة؟

البعض يعتبر القراءة فائقة السرعة أمرا لا يمكن للبشر أن يتقنوه، فكيف يتسنى لنا الانتهاء من القراءة سريعا مع الاحتفاظ بالمعلومات التي نريد تذكرها؟

كثيرون يودون لو استطاعوا القراءة بسرعة فائقة مع فهم ما يقرأون، وهناك من الوسائل والنصائح التي تعود لعقود والتي جربت على أمل قراءة واستيعاب كتاب ضخم في أقل من ساعة.

ونحن نلجأ كثيرا إلى وسيلة ما بين حين وآخر، وهي المطالعة السريعة للنص وتصفحه بحثا عن نقاطه الأساسية. وأحيانا أخرى نستخدم السبابة لرصد الكلمات ومتابعتها بأعيننا لعدم فقد الانتباه، بينما يحاول آخرون قراءة عدة أسطر في مرة واحدة. والآن باتت هناك تقنيات رقمية وتطبيقات تبرز الكلمات بنص ما بالتتابع على الشاشة بوتيرة سريعة.

ولا شك أن تلك الوسائل الذكية تساعد على سرعة القراءة، ولكن يبقى السؤال هو: كم نستوعب مما نقرأه وكم نفقد من الاستيعاب مقابل التعجيل بالقراءة على هذا النحو؟

حين يتعلق الأمر بالأدلة الدامغة فمن الصعب تقييم مدى نفع التدريبات والتطبيقات التي يتم التسويق لها باعتبارها قادرة على تحسين سرعة القراءة، وذلك لندرة التجارب المستقلة المحكومة بمعايير علمية.

ويمكن الرد على بعض الأسئلة بمراجعة جهود عالم النفس الراحل كيث راينر بجامعة كاليفورنيا سان دييغو، فقد أمضى سنوات عديدة في تقييم الآليات وراء بعض تلك الوسائل، وكان رائدا في البحث في سرعة القراءة عبر تتبع حركة العين. وفي عام 2016، نشر راينر ورقة بحثية راجعت آخر ما توصل إليه العلم بشأن محاولات القراءة السريعة.

حين نقرأ، يجري رصد أغلب الكلمات في نقرة شبكية العين وهي الجزء الأوسط من الشبكية حيث تتركز خلايا مخروطية ترصد أشكال النور والظلام في الصفحة وتنقل تلك المعلومات إلى المخ الذي يتعرف على تلك الأشكال ككلمات.

وتهدف بعض وسائل القراءة السريعة لتمرين الشخص على استخدام نطاق أوسع من رؤيته الجانبية في القراءة بحيث يمكنه قراءة أكثر من كلمة في المرة الواحدة، غير أن جوانب الشبكية تحوي عددا أقل من الخلايا المخروطية وعددا أكبر من خلايا أخرى تسمى الخلايا القضبية، وهي أقل قدرة على تمييز النور عن الظلام في الصفحة.

وماذا عن عرض الكلمات الواحدة تلو الأخرى على الشخص ولكن بتتابع أسرع؟ وجد راينر أن هذه الطريقة تفيد في التعجيل بقراءة الجمل، غير أن سرعة القراءة لا تتوقف على العين وحدها بل أيضا على عوامل إدراكية تحد من ذلك، فقد خلص إلى أن الكلمات قد تكون من السرعة بالشكل الذي لا يستطيع المخ معه متابعتها في حالة انسحاب هذه الوسيلة على صفحات كاملة؛ بمعنى أن العين ستتبع الكلمات وتنقلها إلى المخ، ولكنه لن يستوعبها!

فهل من وسيلة للتعجيل باستيعاب الكلمة؟ حين نقرأ نكرر أحيانا الكلمات على أذهاننا دون أن ننطق بها، وهو ما يسمى بالصوت الداخلي، وربما كان الصوت الداخلي سببا في إبطاء قراءتنا. فهل إذا نحينا الصوت الداخلي نتمكن من القراءة بسرعة أكثر؟

ليس بالضرورة، فقد أشار بحث أجرته مالوري لينيغر، عالمة النفس المتخصصة في تتبع حركة العين، إلى أن الصوت الداخلي ربما يساعد على الفهم.

فإذا كان من الصعب الوصول إلى وسيلة موثوقة للإسراع بقدرة العين على متابعة القراءة والذهن على الاستيعاب في نفس الوقت، فالسؤال هو كيف يتسنى لبعض أبطال القراءة فائقة السرعة التهام كتب بأكملها في دقائق وليس ساعات، ومع ذلك يبدو أنهم يفهمون ما يقرأون؟ هل لديهم قدرات خاصة على سرعة التصفح والقفز إلى النقاط المهمة في النص؟

في بعض المواقف قد يفيد التصفح السريع، فأحيانا غاية ما يلزم هو العثور على معلومة معينة في تقرير ما. في تلك الحالة يفيد التصفح السريع.

وأحيانا لا يحتاج المرء لأكثر من فحوى الموضوع، وعندها أيضا تفيد الاستراتيجيات مثل قراءة العناوين والبحث عن الكلمات المفتاحية وقراءة الفقرة الأولى من كل قسم ثم متابعتها بالجملة الأولى من الفقرات اللاحقة. ولكن هذا يعتمد على مادة القراءة، فقد يفيد في الإلمام بالمناهج الدراسية ولا يفيد مع رواية يصعب التكهن بأحداثها.

ولكن الأمر الجيد هو أن بإمكان المرء أن يصبح أكثر سرعة في القراءة، ويكمن الجواب في المران والتدرب. فنحن محكومون ليس فقط بقراءة العين بل أيضا بسرعة رصد الكلمات، ونحن نصبح أكثر سرعة في رصد الكلمات التي ألِفناها، وبالتالي فكلما قرأنا أكثر كلما أصبحنا أسرع وأكثر إجادة لتلك المهارة.

Thursday, January 2, 2020

नोट्स बनाकर पढ़ना क्या ज़्यादा फायदेमंद होता है?

आपको याद होगा बचपन में स्कूल से जो होमवर्क मिलता था, अक्सर उसमें स्कूल में किए गए काम को ही फिर से लिख कर लाने को कहा जाता था.

ज़हन सवाल करता था कि, जो काम हम कर चुके हैं उसे फिर से करने का क्या मतलब? लेकिन हमारे अध्यापक और घर के बुज़ुर्ग कहते थे दोबारा लिखने से सबक़ हमेशा के लिए याद रहेगा. शब्द बार-बार लिखने से ज़हन में बस जाएंगे.

नई तकनीक के आगे, पढ़ने-लिखने का वो तरीक़ा पुराना हो गया है.

आज स्कूल में कॉपी, क़लम की जगह बच्चे लैपटॉप और पैड लेकर जाते हैं. ज़ाहिर तौर हम इसे बदलते दौर का अच्छा और नया अंदाज़ मान सकते हैं लेकिन क्या वास्तव में नई तकनीक की मदद से पढ़ने का ये अंदाज़ छात्रों के लिए मुफ़ीद है?

2014 में अमरीका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में एक तजुर्बा किया गया. इसमें लेक्चर के नोट तैयार करने के लिए आधे छात्रों को काग़ज़ क़लम दिए गए और बाक़ी आधे छात्रों को लैपटॉप.

ज़ाहिर है नौजवान पीढ़ी की-बोर्ड पर अंगुलियां चलाते आगे बढ़ रही है, तो लैपटॉप पर नोट तैयार करने वाले छात्रों ने हर्फ़-ब-हर्फ़ लेक्चर के नोट्स बनाए. जबकि काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों ने लेक्चर समझ कर अपने ज़हन में उसके प्वाइंट बनाए. फिर उन्हें काग़ज़ पर उतारा.

बाद में छात्रों की समझ जांचने के लिए उनसे लेक्चर से संबंधित कुछ सवाल पूछे गए. जहां तक बात थी तथ्यों की, तो दोनों ही छात्रों ने लगभग सही जवाब दिए लेकिन जब लेक्चर का सार, उसके मायने पूछे गए तो काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों ने ज़्यादा बेहतर जवाब दिए.

दरअसल की-बोर्ड पर टाइपिंग करते समय छात्र सिर्फ़ लेक्चर सुनकर उसे लिख रहे थे. लेक्चर की विषयवस्तु पर उनका ध्यान नहीं था. जबकि काग़ज़ क़लम इस्तेमाल करने वालों के पास लेक्चर समझकर उसके नोट्स बनाने के अलावा कोई और चारा नहीं था. क्योंकि क़लम से पूरा लेक्चर लिखना संभव नहीं था.

काग़ज़-क़लम इस्तेमाल करने का एक फ़ायदा और है. नोट्स बनाते समय ज़रूरी बातें अंडरलाइन की जा सकती हैं. और, ज़रूरत पड़ने पर केवल उन्हीं बिंदुओं पर नज़र दौड़ा लेने भर से पूरा लेक्चर समझा जा सकता है.

साथ ही याद रखने के लिए अतिरिक्त जानकारियां हाशिए पर लिखी जा सकती हैं. जबकि टाइपिंग के दौरान ऐसा करना ज़रा मुश्किल होता है. इसीलिए, जब टाइप किए गए लेक्चर में अगर कोई ख़ास बात तलाशनी हो तो पूरा लेक्चर पढ़ना पड़ेगा.

छात्रों के साथ इसी तरह का एक और प्रयोग किया गया. इस बार छात्रों को आगाह किया गया था कि वो हर्फ़-ब-हर्फ़ नोट्स तैयार नहीं करेंगे. लेकिन पता चला कि लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले छात्रों ने हर्फ़-ब-हर्फ़ ही नोट्स तैयार किए.

और जब लेक्चर से संबंधित वैचारिक सवाल पूछे गए तो वो जवाब नहीं दे पाए. रिसर्च में ये भी पता चला कि लैपटॉप पर तैयार किए गए हर्फ़-ब-हर्फ़ लेक्चर दोहराने में भी आसान नहीं होते.

नोट्स तैयार करने के एक हफ़्ते बाद जब छात्रों से लेक्चर से संबंधित सवाल पूछे गए तो काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का प्रदर्शन ज़्यादा बेहतर था. दरअसल काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का ज़हन पूरी बात सुनकर उसकी ख़ास बातें संजो लेता है.

इसीलिए ऐसे छात्रों को लंबे समय तक लेक्चर याद रहता है. जबकि लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले छात्रों का दिमाग़ लेक्चर को हू-ब-हू उतार लेने में व्यस्त रहता है.

ताकि, बाद में भी उसे कई बार सुनकर अच्छी तरह याद रखा जा सके. लेकिन, ये तरीक़ा कारगर है या नहीं, ये पता लगाने के लिए अमरीका की नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में एक प्रयोग किया गया.

फ़ार्मेसी के छात्रों का एक लेक्चर दो हिस्सों में बांट दिया गया. लेक्चर के एक हिस्से की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और आधे हिस्से की रिकॉर्डिग नहीं की गई. लेक्चर के एक हफ्ते बाद सभा छात्रों को लेक्चर दोहराने को कहा गया. लेकिन नतीजों में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं था.

लेक्चर रिकॉर्ड करना या नहीं करना, किसी की निजी पसंद हो सकता है. टाइप किए गए नोट्स का एक फायदा है कि, इन्हें सहेज कर रखने में आसानी होती है.

2019 में नॉर्वे के हेलसिंकी में मेडिकल के छात्रों को आई-पैड दिए गए. ये उन्हें सबक़ याद रखने में काफ़ी मददगार साबित हुए. टैबलेट इस्तेमाल करने से उन्हें नॉन-लीनियर नोट्स तैयार करने में मदद मिली.

हालांकि लैपटॉप, आई-पैड, टैबलेट जैसे गैजेट्स छात्रों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं. लेकिन, इनके इस्तेमाल करने या नहीं करने से छात्रों के प्रदर्शन पर कितना असर पड़ता है इस पर रिसर्च नहीं हुई है.

बहरहाल अगर आप टाइप तेज़ कर लेते हैं और नोट्स की नक़ल रखना चाहते हैं, तो लैपटॉप बेहतर विकल्प है. लेकिन, अगर कोई भी लेक्चर का भाव गहराई से समझना चाहता है, तो हाथ से लिखकर नोट्स तैयार करना ही बेहतर है.

आपको याद होगा बचपन में स्कूल से जो होमवर्क मिलता था, अक्सर उसमें स्कूल में किए गए काम को ही फिर से लिख कर लाने को कहा जाता था.

ज़हन सवाल करता था कि, जो काम हम कर चुके हैं उसे फिर से करने का क्या मतलब? लेकिन हमारे अध्यापक और घर के बुज़ुर्ग कहते थे दोबारा लिखने से सबक़ हमेशा के लिए याद रहेगा. शब्द बार-बार लिखने से ज़हन में बस जाएंगे.

नई तकनीक के आगे, पढ़ने-लिखने का वो तरीक़ा पुराना हो गया है.

आज स्कूल में कॉपी, क़लम की जगह बच्चे लैपटॉप और पैड लेकर जाते हैं. ज़ाहिर तौर हम इसे बदलते दौर का अच्छा और नया अंदाज़ मान सकते हैं लेकिन क्या वास्तव में नई तकनीक की मदद से पढ़ने का ये अंदाज़ छात्रों के लिए मुफ़ीद है?

2014 में अमरीका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में एक तजुर्बा किया गया. इसमें लेक्चर के नोट तैयार करने के लिए आधे छात्रों को काग़ज़ क़लम दिए गए और बाक़ी आधे छात्रों को लैपटॉप.

ज़ाहिर है नौजवान पीढ़ी की-बोर्ड पर अंगुलियां चलाते आगे बढ़ रही है, तो लैपटॉप पर नोट तैयार करने वाले छात्रों ने हर्फ़-ब-हर्फ़ लेक्चर के नोट्स बनाए. जबकि काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों ने लेक्चर समझ कर अपने ज़हन में उसके प्वाइंट बनाए. फिर उन्हें काग़ज़ पर उतारा.

बाद में छात्रों की समझ जांचने के लिए उनसे लेक्चर से संबंधित कुछ सवाल पूछे गए. जहां तक बात थी तथ्यों की, तो दोनों ही छात्रों ने लगभग सही जवाब दिए लेकिन जब लेक्चर का सार, उसके मायने पूछे गए तो काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों ने ज़्यादा बेहतर जवाब दिए.

दरअसल की-बोर्ड पर टाइपिंग करते समय छात्र सिर्फ़ लेक्चर सुनकर उसे लिख रहे थे. लेक्चर की विषयवस्तु पर उनका ध्यान नहीं था. जबकि काग़ज़ क़लम इस्तेमाल करने वालों के पास लेक्चर समझकर उसके नोट्स बनाने के अलावा कोई और चारा नहीं था. क्योंकि क़लम से पूरा लेक्चर लिखना संभव नहीं था.

काग़ज़-क़लम इस्तेमाल करने का एक फ़ायदा और है. नोट्स बनाते समय ज़रूरी बातें अंडरलाइन की जा सकती हैं. और, ज़रूरत पड़ने पर केवल उन्हीं बिंदुओं पर नज़र दौड़ा लेने भर से पूरा लेक्चर समझा जा सकता है.

साथ ही याद रखने के लिए अतिरिक्त जानकारियां हाशिए पर लिखी जा सकती हैं. जबकि टाइपिंग के दौरान ऐसा करना ज़रा मुश्किल होता है. इसीलिए, जब टाइप किए गए लेक्चर में अगर कोई ख़ास बात तलाशनी हो तो पूरा लेक्चर पढ़ना पड़ेगा.

छात्रों के साथ इसी तरह का एक और प्रयोग किया गया. इस बार छात्रों को आगाह किया गया था कि वो हर्फ़-ब-हर्फ़ नोट्स तैयार नहीं करेंगे. लेकिन पता चला कि लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले छात्रों ने हर्फ़-ब-हर्फ़ ही नोट्स तैयार किए.

और जब लेक्चर से संबंधित वैचारिक सवाल पूछे गए तो वो जवाब नहीं दे पाए. रिसर्च में ये भी पता चला कि लैपटॉप पर तैयार किए गए हर्फ़-ब-हर्फ़ लेक्चर दोहराने में भी आसान नहीं होते.

नोट्स तैयार करने के एक हफ़्ते बाद जब छात्रों से लेक्चर से संबंधित सवाल पूछे गए तो काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का प्रदर्शन ज़्यादा बेहतर था. दरअसल काग़ज़ क़लम का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का ज़हन पूरी बात सुनकर उसकी ख़ास बातें संजो लेता है.

इसीलिए ऐसे छात्रों को लंबे समय तक लेक्चर याद रहता है. जबकि लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले छात्रों का दिमाग़ लेक्चर को हू-ब-हू उतार लेने में व्यस्त रहता है.

ताकि, बाद में भी उसे कई बार सुनकर अच्छी तरह याद रखा जा सके. लेकिन, ये तरीक़ा कारगर है या नहीं, ये पता लगाने के लिए अमरीका की नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में एक प्रयोग किया गया.

फ़ार्मेसी के छात्रों का एक लेक्चर दो हिस्सों में बांट दिया गया. लेक्चर के एक हिस्से की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और आधे हिस्से की रिकॉर्डिग नहीं की गई. लेक्चर के एक हफ्ते बाद सभा छात्रों को लेक्चर दोहराने को कहा गया. लेकिन नतीजों में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं था.

लेक्चर रिकॉर्ड करना या नहीं करना, किसी की निजी पसंद हो सकता है. टाइप किए गए नोट्स का एक फायदा है कि, इन्हें सहेज कर रखने में आसानी होती है.

2019 में नॉर्वे के हेलसिंकी में मेडिकल के छात्रों को आई-पैड दिए गए. ये उन्हें सबक़ याद रखने में काफ़ी मददगार साबित हुए. टैबलेट इस्तेमाल करने से उन्हें नॉन-लीनियर नोट्स तैयार करने में मदद मिली.

हालांकि लैपटॉप, आई-पैड, टैबलेट जैसे गैजेट्स छात्रों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं. लेकिन, इनके इस्तेमाल करने या नहीं करने से छात्रों के प्रदर्शन पर कितना असर पड़ता है इस पर रिसर्च नहीं हुई है.

बहरहाल अगर आप टाइप तेज़ कर लेते हैं और नोट्स की नक़ल रखना चाहते हैं, तो लैपटॉप बेहतर विकल्प है. लेकिन, अगर कोई भी लेक्चर का भाव गहराई से समझना चाहता है, तो हाथ से लिखकर नोट्स तैयार करना ही बेहतर है.